छत्तीसगढ़ में नेताओं की सुरक्षा में हुई कमी, जाने किनको क्या मिला!
छत्तीसगढ़ राज्य में अब नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा में कमी की गई है, वही जिनको Z+ कि सुरक्षा प्राप्त थी उनको अब z श्रेणी की सुरक्षा दी जा रही है, पढ़े पूरी खबर

जगदलपुर। प्रदेश में जब नक्सलवाद अपने चरम पर था, तब बस्तर क्षेत्र के सभी जन प्रतिनिधियों को जबरदस्त सिक्यूरिटी प्रदान की जाती थी पर अब नियमों बदलाव किया गया है। अब छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग में जब से नक्सलवाद खत्म हुआ है उस दिन के बाद से सुरक्षा की संख्या में कमी किया गया। जहां हर एक जनप्रतिनिधि के गाड़ी गुजरने पर उसके पीछे पुलिस का काफिला चलता था। पर अब यह ऐसा नहीं रह गया है। जब से नक्सलवाद खत्म हुआ है उसके बाद से छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा सुरक्षा को घटाने का फैस लिया गया है।
प्रदेश में लगभग 116 लोगो की सुरक्षा घाटी
राज्य के लगभग 116 नेताओं की सुरक्षा में बदलाव किया गया है, जिसमें आप को बता दे कि सुरक्षा की श्रेणी में भारी बदलाव करते हुए जिनको Z+ सुरक्षा प्राप्त है उनको सिर्फ Z सुरक्षा दिया गया है। वही कुछ नेताओं को मिलने वाली Z सुरक्षा को खत्म कर उन्हें Y श्रेणी में सुरक्षा प्रदान की गई है। वही इसने सिर्फ कांग्रेस के जनप्रतिनिधि को ही नहीं बल्कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों राजनीतिक पार्टी के जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा में कमी की गई है। आपको बता दे कि इन नेताओं ने शामिल करीब 9 नेताओं की Z+ सुरक्षा को हटा कर के सिर्फ Z की सुरक्षा कर दिया गया है।
यहां तक सुरक्षा के मामले में प्रदेश में बैठे मंत्री नेताओं की सुरक्षा में कमी की गई है। जहां प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा, और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, के साथ-साथ पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की सिक्योरिटी में कड़ी कटौती की गई है। एक समय था जब बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खतरों के चलते नेताओं और जनप्रतिनिधियों में खौफ देखा जाता था। और अगर कही भी सुरक्षा में कमी दिखती तो नक्सली मौका देख उन नेताओं और जनप्रतिनिधियों को टारगेट कर उड़ा दिया करते थे।
पर अब नक्सलमुक्त अभियान ने नक्सल के डर को खत्म कर दिया और अब जो सुरक्षा नेताओं को मिलती थी इसमें अब कमी की जा रही है। उस समय नक्सलियों के सूत्र बहुत मजूद साबित होते रहे थे। और उनको तेजी से इसकी जानकारी मिलती थी कि इस नेता व जनप्रतिनिधी कि सुरक्षा में कमी हुई है या फिर यू कहे कि सुरक्षा कम है। उसके बाद नक्सलियों के द्वारा खूब प्लान बनाया जाता था और मौका देख कर के उनपर गोली चलाया जाता था। जिसके चलते नेताओं और जनप्रतिनिधियों में उस समय बहुत ज्यादा ही डर का माहौल पैदा हो गया था। पर अब परिस्थितियों में बदलाव देखा गया है।
खास कर नक्सलमुक्त अभियानों के चलते यह कमी पाई गई है।
वैसे हालात बदलने से बहुत कुछ अच्छा हो गया है, अब जहां एक विधायक या मंत्री के लिए बड़ी लंबी जो काफिला चलता था वह अब कम हो जाएगा, जहां नेताओं की मौजूदगी में सुरक्षा के लिए दर्जनों जवानों को तैनात किया जाता था ताकि किसी भी प्रकार से जान का खतरा न हो अब यह अलग दिखाई देने वाला है। अब जो बाकी क्षेत्रों में जिन विधायकों और नेताओं को सुरक्षा दी जा रही है ठीक उसी प्रकार ही बस्तर के तमाम नेताओं और जनप्रतिनिधियों को प्रदान होगीं
बात करे सुरक्षा में श्रेणियों की तो सबसे ज्यादा जवान Z+ कि सुरक्षा में तैनात होते है जिसमे लगभग 55 जवानों की टीम की सुरक्षा घेरा होता है जो अलग-अलग एंगल से सुरक्षा देते है। वही बात सिर्फ Z सुरक्षा की करे तो यह 55 जवानों की संख्या में कम होता है जिसके केवल 22 जवान ही तैनात होते है। देखिए सुरक्षा की दृष्टि से देखा जाए तो यह अभी की परिस्थिति में यह एक सही निर्णय है, क्योंकि अभी नक्सलवाद खत्म हो चुका है। वही जहां सुरक्षा की तस्वीरें लोगों तक पहुंचती है तो कही न कही यह सवाल भी उठाया जाता रहा है कि ये सभी जबरदस्ती का सुरक्षा मिला हुआ है इसमें जनता की टैक्स के पैसे का दुरुपयोग कहा जाता रहा है।
बता दे कि आगामी परिस्थितियों के हिसाब से इन सुरक्षा में और भी बदलाव देखा जा सकता है जैसे जिस भी व्यक्ति को अगर खतरा अधिक हो सकता है तो उनकी सुरसा बढ़ाई जा सकती है। यह पूर्णतः व्यक्ति की वर्तमान कंडीशन पर निर्भर करता है कि उनको कितनी और कौन सी श्रेणी की सुरक्षा की जरूरत है!




