Telegram Join our Telegram Channel for Daily Latest News Updates! Join Now ×

बस्तर दशहरा: कांछन देवी ने राजा को दी महापर्व मनाने की अनुमति

बस्तर दशहरा एक ऐसा महापर्व ही जिसकी शुरुवात ही रोमांच भरा होता है। इसके शुरू होने से पहले काछन देवी की पूजा कर उनसे अनुमति लेनी पड़ती है, देवी कांटे की झूला में सवार होकर राजा को अनुमति देती है फिर शुरू होता है यह महापर्व बस्तर दशहरा।

बस्तर। छत्तीसगढ़ राज्य का विश्व प्रसिद्ध तेवहर बस्तर दशहरा महापर्व का शुरुवात हो चुका है। जहां शुरुवात होने की जो विधि होती है वह बहुत रोमांचक भरा रहा इसमें एक नन्ही सी बालिका पर देवी शवार होती है, उसके बाद देवी काछन पर सवार हो कर बस्तर के राजा को अनुमति देती है कि जाओ बस्तर दशहरा का महापर्व मनाओ। बात करे पर्व के रस्मों की तो यह रस्म करीब सात सौ साल पुरानी परंपरा के तहत काछन गादी की रस्म को निभाई जा रही है।

आप फोटो में देख रहे होंगे जो नन्हीसी बालिका है जिसके ऊपर काछन देवी स्वर है। वो मूल बस्तर की रहवासी है, पिछले कई सालों से बालिका पर देवी आती है और बड़े ही प्यार दुलार और तेल हल्दी के साथ इस विधान को किया जाता है, और अंतिम जब देवी बस्तर दशहरा महापर्व की अनुमति देती है।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

कांटे के झूले में सवार होती है देवी

बात करे इस झूले की तो यह झूला कोई आम झूला नहीं है, यह झूला बड़े नुकीले काटों का झूला होता है, जिसपर देवी झूलती है और अनुमति देती है। इस महापर्व में बस्तर के राजा का भी बहुत महत्वपूर्ण कार्य है जैसे देवी से अनुमति लेना और बाजे गाजे के साथ जनता के बीच जा कर के इस पर्व का शुरुवात करना है। लेकिन अगर देवी अनुमति न दे तो यह पर्व वही रुक जाता है और उत्साह नहीं मनाया जाता है।

PDF LINK – DocScanner 10 Oct 2026 14-20

यह महापर्व सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि बस्तर की संस्कृति और वाहन का आस्था का सबसे बड़ा प्रमाण है। यह दशहरा रावण पर विजय पाने को लेकर नहीं मनाया जाता यह पर्व मां दंतेश्वरी के आगमन को लेकर के यह महापर्व मनाया जाता है और 75 दिनों का यह महापर्व मनाया जाता है जिससे लोगो का अटूट श्रद्धा और विश्वास झलक उठता है, इस पर्व में लगभग 300 से ज्यादा देवी देवता अलग अलग गांव से आते है और बाजे की गूंज में नाचते और एक दूसरे देवता से मिलते जुलते है, और सभी देवी देवता बस्तर के राजा को प्रणाम कर उनसे भेट करते है।

विदेशी पर्यटकों का होता है आगमन

75 दिनों तक पूरे बस्तर क्षेत्र में उत्साह और खुशहाली अपने चरम पर होती है। रोज नए नए चीज देखने को मिलती है। वही इसे देखने के लिए न केवल अन्य राज्यों से ही लोग नहीं आते बल्कि विदेश से भी कई पर्यटकों का आगमन होता है और वो इस सुंदर परंपरा को अपने कैमरे में कैद करते है। बस्तर वैसे ही अपने प्रकृति सुंदरता का एक प्रतीक और प्रमाण रहा है। और जब आयोजन होता है बस्तर दशहर का तो यह और भी ऐतिहासिक और रोमांचक बन जाता है।

यहां के देवी देवताओं का परंपरा जिसमें देवी देवता एक दूसरे से मिलते है बाजा बजते रहता है देवी देवता बाजे की धुन में झूमते रहते है। यह देखने के लिए बस्तर में की लाखों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है। और यहां का बाजा कोई डीजे म्यूजिक की तरह नहीं होता बल्कि मांदर और मोहरी से बाजा को बजाया जाता है और देवी देवताओं को बुलाया जाता है जिसके बाद बस्तर के एक जगह जहां मुख्य रूप से पर्व को मनाया जा रहा हो वहां सभी देवी देवता एकत्रित होते है और महापर्व को मनाते है।

📢 विज्ञापन हेतु निवेदन: यदि आपके क्षेत्र से जुड़ी कोई महत्वपूर्ण स्थानीय खबर, सामाजिक गतिविधि या जनहित से संबंधित जानकारी है, तो कृपया प्रकाशन के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल के साथ साझा करें। विज्ञापन एवं प्रचार-प्रसार हेतु भी आप हमसे संपर्क कर सकते हैं। मो.6263765321
Was this article helpful?
YesNo
WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

Editorial Staff

मैं स्वतंत्र पत्रकार हूँ एवं (MY CG NEWS का मुख्य संपादक हूँ) तथा छत्तीसगढ़ की राजनीति, समाज, अपराध व जनहित से जुड़ी खबरों को तथ्यों के साथ सरल और निष्पक्ष भाषा में पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास करता हूँ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button